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शुक्रवार, 22 मार्च 2013

'' बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये? ''





अखियाँ तरसें दर्श को तेरे, कुंजबिहारी कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये?

द्वारका गलियाँ,तुझ बिन सूनी, श्याम न्यारे कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये?






 गोकुल की गैया,बलराम पुकारे, नंद दुलारे कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये?

वृंधावन पूछे, राधा पुकारे,ए मोहन प्यारे कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये?






अर्जुन व्याकुल सारथी के बिन,पार्थ के प्यारे कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये?

कलयुग आया,अनर्थ है लाया,सबके सहारे कहाँ गये?
 बाँके बिहारी, ए गिरिधारी ,मेरी बारी कहाँ गये ??

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

''मेरे बांकेबिहारी''
















सोने जैसा रूप है तेरा,
तुम पर मैं जायूं वारी
अब तो दर्श दिखाओ
ओ मेरे गिरिधारी


सुन्दर छवि है तेरी
कजरारे हैं तेरे नैन
कब से राह निहारूं
तुम बिन मैं बेचैन


गोकुल हुआ दीवाना
घर बार है सबका छूटा
इंसान हो तुम या देवा
यह भ्रम भी सबका टूटा


नंदलला कहूँ, कन्हैया कहूँ
कृष्णा कहूँ या कहूँ गिरधारी
तुम ही करोगे पार यह नैया
सुनो ओ मेरे बांकेबिहारी

रविवार, 25 नवंबर 2012

''....तोरी कृष्णा प्रीत मोहे भांवरी बनाए रे....''





तोरी कृष्णा प्रीत मोहे भांवरी बनाए रे
चैन ना आए मोहे चैन ना आए रे

सब जग रूठा , सब बंधन झूठा
तू ही मुझे घड़ी घड़ी अपना बनाए रे

तोरी कृष्णा प्रीत मोहे भांवरी बनाए रे
चैन ना आए मोहे चैन ना आए रे

रिश्ते काहे के , नाते काहे के
तुझसे से ही नाता मेरा जुड़ता जाए रे

तोरी कृष्णा प्रीत मोहे भांवरी बनाए रे
चैन ना आए मोहे चैन ना आए रे

राधा सी प्रीत दे दे,मीरा सी दीवानगी
तेरा ही रंग मोह पे चड़ता जाए रे

तोरी कृष्णा प्रीत मोहे भांवरी बनाए रे
चैन ना आए मोहे चैन ना आए रे

शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

!! हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार !!

हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार

तू है हम सब का दाता,भरता झोली जो खोली,
करदे कृपा तू ऐसी ,हमरा बेड़ा तू तार,
हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार!


हम सब पौधे हैं तेरे,तू है हम सब का माली,
शरण लगालो दाता,बनके हमरी सरकार,
हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार!


हम सब बच्चे हैं तेरे,तू है हम सब का वाली,
तुम पार लगादो नैया ,बनके हमरी पतवार,
हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार!


हम सब अपने में डूबे तू करता सबकी रखवाली,
यहाँ कोई ना किसी का,हमको तेरी दरकार,
हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार!



सारे श्रदा से आएँ,सबका तू ही सवाली,
तू है हारे का सहारा,सुनले हमरी पुकार,
हम सब आए कन्हैया,मिल के तेरे दरबार!!

शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2012

''राधा की प्रीत''


कृष्ण के साथ, राधा को सर्वोच्च देवी स्वीकार किया जाता है,
"यह एक जटिल संबंध है, क्योंकि भक्त `समान है फिर भी भिन्न है' भगवान से, और इसलिए मिलन की खुशी में वहां विरह का दर्द है. वास्तव में भक्ति का उच्चतम रूप, मिलन में नहीं होता बल्कि मिलन के बाद होता है, 'विरह के नए डर' में! राधा की विरह को दर्शाती छोटी सी रचना:-
कृष्णा तेरी मूरत में खोई हूँ ऐसे,
चँदा में खो जाए चकोर है जैसे!


तेरी मूरत में सारे जहाँ का प्यार है,
चकोर जैसे बिन चाँद के बेकरार है!


तू है मेरा चाँद चकोर हूँ मैं तेरी,
तेरे बिन क्या है जिंदगानी मेरी!


आँचल में छुपा ले ऐसे तू मुझे,
देख तू मुझको और देखूं मैं तुझे!

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012

''मेरे कन्हैया''


नटखट था बचपन,
जवानी थी संजीदा!
सब कुछ संभाला,
चाहे कितना पेचीदा!
लग्न राधा जैसी,
अगर उससे लगा लो!
कुछ नहीं नामुमकिन,
जो चाहो तुम पा लो!

सबकी वो बिन माँगे,
खाली झोली भरता!
सुखों का वोह दाता,
दुखों को है हरता!
दुखियारे भक्तों की,
पार करो तुम नैया!
ओ मेरे साँवरिया,
ओ मेरे कन्हैया!! .

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